अफगानिस्तान में सत्ताधारी तालिबान सरकार ने पाकिस्तान की हालिया हवाई कार्रवाई के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई है। तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तान ने अस्पताल में भर्ती निर्दोष नागरिकों पर जानलेवा हमले किए हैं, जिसमें करीब 400 लोगों की मौत हुई है। इस घटना के बाद अफगानिस्तान के नेतृत्व ने पाकिस्तान के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया है।
तालिबान के प्रवक्ता ने बयान दिया है कि पाकिस्तान ने बेकसूर मरीजों को निशाना बनाकर एक अक्षम्य काम किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कोई भी शांतिपूर्ण बातचीत संभव नहीं रह गई है। तालिबान के इस बयान से क्षेत्र में तनाव की स्थिति और गहरी हो गई है।
अफगानिस्तान की ओर से पाकिस्तान को ‘गंभीर परिणाम’ की चेतावनी दी गई है। तालिबान सरकार ने कहा है कि पाकिस्तान के इस कदम के लिए उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। यह बयान न केवल पाकिस्तान को सीधा संदेश है, बल्कि पूरे क्षेत्र में एक मजबूत सिग्नल है कि तालिबान किसी भी तरह के सीमा पार हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस घटना ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और भी कठोर बना दिया है। पाकिस्तान का दावा है कि उसकी सेना ने आतंकवादियों पर निशाना साधा था, लेकिन अफगानिस्तान का कहना है कि ये हमले सुनियोजित तरीके से अस्पताल जैसी असैनिक सुविधाओं पर किए गए थे।
आंतर्राष्ट्रिक समुदाय भी इस घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने असैनिक नुकसान को लेकर तत्काल जांच की मांग की है। वहीं, अनेक देशों ने पाकिस्तान से सीमा पार हमलों को रोकने का आह्वान किया है।
तालिबान के अब तक के बयानों से यह साफ हो गया है कि वह किसी भी कीमत पर पाकिस्तान के इस रवैये को स्वीकार नहीं करने वाला। तालिबान ने अपनी सैन्य क्षमता में भी बढ़ोतरी की है और पाकिस्तान के खिलाफ मजबूत रुख अपनाने के लिए तैयार है।
इस पूरी घटना से साफ दिखता है कि दक्षिण एशिया के इस क्षेत्र में शांति स्थापना की राह बेहद मुश्किल हो गई है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह तनाव न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बना हुआ है। आने वाले समय में क्या स्थिति और गंभीर होगी, यह समय ही बताएगा।