रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ का टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। इसी बीच एक दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि जापान में बनी रामायण पर आधारित फिल्म को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया था। आइए जानते हैं इस विवादास्पद फैसले के पीछे की पूरी कहानी। जापान में निर्मित फिल्म ‘रामायण: द लेजेंड ऑफ प्रिंस राम’ को साल 1992 में रिलीज किया गया था। यह फिल्म जापानी निर्देशक राजीव चिल्ड्स द्वारा निर्देशित थी। फिल्म में भारतीय महाकाव्य रामायण की कहानी को आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया था। हालांकि, इसी वजह से भारत में इसे विवादास्पद माना गया और भारतीय सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया। फिल्म को बैन करने का मुख्य कारण था कि इसमें रामायण की पवित्र कथा को विकृत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। धार्मिक संगठनों और भारतीय समाज के एक बड़े हिस्से का मानना था कि फिल्म में देवताओं और महापुरुषों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया है। इसके अलावा, कुछ दृश्यों को भारतीय संस्कृति और धार्मिक मूल्यों के खिलाफ माना गया। भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होने के बावजूद, कानून में कुछ प्रावधान हैं जो धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली सामग्री को प्रतिबंधित करते हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 295-A के तहत किसी भी धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री को प्रतिबंधित किया जा सकता है। इसी कानून के तहत इस जापानी फिल्म पर प्रतिबंध लगाया गया था। भारतीय फिल्म निर्माताओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण संदेश था कि धार्मिक विषयों को लेकर किस तरह की संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। रामायण, महाभारत और अन्य धार्मिक पवित्र ग्रंथ भारतीय समाज के लिए सर्वोच्च महत्व रखते हैं। इन पर बनने वाली फिल्मों को भारतीय मूल्यों और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। इसके विपरीत, जब भारतीय फिल्मकारों ने रामायण पर फिल्में बनाई हैं, तो उन्हें व्यापक सफलता और स्वीकृति मिली है। रामानंद सागर की टीवी सीरीज ‘रामायण’ भारतीय दर्शकों के दिलों में सदा के लिए स्थान बना चुकी है। इसी तरह, अन्य भारतीय निर्माताओं द्वारा बनी रामायण पर आधारित फिल्मों को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। वर्तमान में, रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ की घोषणा के बाद भारतीय दर्शकों में काफी उत्सुकता देखी जा रही है। यह फिल्म भी भारतीय संस्कृति और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए बनाई जा रही है। इसलिए, भारतीय फिल्मकारों की जिम्मेदारी है कि वे धार्मिक विषयों को सांस्कृतिक संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करें। कुल मिलाकर, जापानी फिल्म पर प्रतिबंध भारतीय समाज की धार्मिक संवेदनशीलता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। यह घटना दिखाती है कि कैसे विभिन्न संस्कृतियों के बीच सामग्री को समझने और प्रस्तुत करने के तरीके में अंतर हो सकता है। Post navigation सरकार का यू-टर्न: फ्री सीट सिलेक्शन खत्म, अब देना होगा अतिरिक्त शुल्क Sumana Das: Tumpa Sona से Festival Films तक का सफर