क्या अमेरिका वाकई समय को पीछे की ओर मोड़ना चाहता है? ईरान FM का ट्रंप की ‘पाषाण युग’ टिप्पणी पर तीखा प्रहार तेहरान में तनाव की स्थिति बढ़ गई है क्योंकि ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने डोनाल्ड ट्रंप की विनाशकारी धमकियों पर कठोर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अराघची ने ट्रंप के ‘पाषाण युग’ की टिप्पणी के संदर्भ में सवाल उठाया कि क्या अमेरिका वाकई इतिहास को पीछे की ओर ले जाना चाहता है। ईरान के शीर्ष राजनयिक ने अपने बयान में ट्रंप की आक्रामक नीति की तुलना आदिम विचारधारा से की है। अराघची ने कहा कि ईरान ने हमेशा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास किया है और किसी भी सैन्य संघर्ष की कामना नहीं करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की रक्षा क्षमता अत्यंत मजबूत है और वह किसी भी प्रकार के आक्रमण का जवाब देने के लिए तैयार है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी है। उन्होंने ईरान के लंबे और समृद्ध इतिहास को रेखांकित किया, जो सांस्कृतिक विकास और सभ्यतागत प्रगति का प्रतीक है। पेजेशकियन ने जोर दिया कि ईरान एक शांतिप्रिय राष्ट्र है जो अपने नागरिकों के कल्याण में विश्वास करता है। ट्रंप के पूर्व कार्यकाल के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की स्थिति थी। 2018 में ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर दिया था, जिससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में असंतोष पैदा हुआ था। वर्तमान में ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी एक बार फिर क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही है। ईरान के नेताओं का यह रुख दर्शाता है कि वे किसी भी प्रकार की डराधमकी से प्रभावित नहीं हैं। अराघची का ‘पाषाण युग’ की टिप्पणी पर व्यंग्य हिंसा की बजाय सांस्कृतिक और राजनयिक उत्तर के रूप में समझा जा सकता है। यह ईरान की मजबूत आंतरिक एकता को भी दर्शाता है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की इस प्रकार की धमकियां अंतर्राष्ट्रीय कानून और राजनयिक मानदंडों के विरुद्ध हैं। मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए संवाद और समझौते की आवश्यकता है, न कि सैन्य धमकियों की। ईरान ने भी पहले कई बार यह संकेत दिया है कि वह परमाणु समझौते पर वापसी के लिए तैयार है, बशर्ते अमेरिका भी अपनी शर्तें पूरी करे। यह विवाद एक महत्वपूर्ण समय पर आया है जब मध्य पूर्व में कई क्षेत्रीय संघर्ष पहले से ही चल रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए चिंताजनक है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। ईरान का यह सशक्त रुख इस बात का संकेत है कि वह किसी भी आक्रामक नीति के सामने झुकने के लिए तैयार नहीं है। अराघची की तीखी प्रतिक्रिया ईरान की राजनयिक समझदारी और आत्मविश्वास को दर्शाती है। आने वाले दिनों में इस विवाद का विकास क्या होगा, यह देखने का विषय है। Post navigation Mental Health Market 668.62 Billion तक पहुंचेगा 2035 तक Amazon MX Player AI से बढ़ा विज्ञापन और राजस्व