ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट मंडरा रहा है। इस भू-राजनीतिक संकट की वजह से तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, महंगाई बढ़ रही है, करेंसी कमजोर हो रही है और शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। भारतीय रुपये पर भी यह दबाव स्पष्ट दिख रहा है। ऐसे समय में अगर हम अतीत में देखें, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने दो बार भारी संकट का सामना करते हुए बेहद बुद्धिमानी से काम लिया था।

1991 का आर्थिक संकट: पहली बार आया भारी दबाव

1990 के दशक की शुरुआत में भारत को सबसे भीषण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा था। इसी समय खाड़ी युद्ध शुरू हुआ था और तेल के दाम में जबरदस्त उछाल आया था। विदेशी निवेश सूख गया, विदेशी मुद्रा भंडार खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। भारतीय रुपया अपने सर्वकालिक निम्न स्तर पर था। तब RBI के गवर्नर बिमल जालान ने विदेशी मुद्रा को बेचकर रुपये को आधार देने की रणनीति अपनाई थी। साथ ही सोने को गिरवी रखकर विदेशी मुद्रा प्राप्त की गई थी। इन कदमों से रुपये में स्थिरता आई और धीरे-धीरे विदेशी निवेश भी लौटने लगा।

2008 का वैश्विक वित्तीय संकट

2008 में जब अमेरिका में सबप्राइम संकट से वैश्विक वित्तीय बाजार ध्वस्त हो गया था, तब भारत को भी भारी दबाव का सामना करना पड़ा था। विश्वव्यापी मंदी की चपेट में भारतीय शेयर बाजार गिरा और रुपया भी कमजोर पड़ गया। तब RBI के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने आक्रामक नीति अपनाई थी। उन्होंने सिस्टम में नकदी बढ़ाने के लिए रेपो रेट को घटाया और विभिन्न मौद्रिक उपकरणों का प्रयोग किया। साथ ही बैंकिंग सिस्टम को नकद उपलब्ध कराने के लिए विशेष उपाय किए गए। इससे भारतीय बाजार को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ।

वर्तमान में RBI की तैयारी

वर्तमान गवर्नर शक्तिकांत दास के नेतृत्व में RBI पहले से ही सतर्क है। विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखा गया है और मुद्रा नीति को लचीला रखा गया है। रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है।

सीखें गई बातें

पिछले संकटों से RBI को पता चल गया है कि संकट के समय विदेशी निवेश को आकर्षित करना और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखना कितना जरूरी है। नीति की पारदर्शिता और समय पर सही कदम उठाना भी महत्वपूर्ण है।

वर्तमान समय में भी भारत की मजबूत बुनियादी अर्थव्यवस्था इसे संकट से निपटने में सक्षम बनाती है। RBI की अनुभवी टीम पिछली गलतियों से सीखकर बेहतर तरीके से हालात को संभाल रही है।