अप्रैल नीति समीक्षा में RBI दरें होल्ड कर सकता है: अर्थशास्त्रियों का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अप्रैल की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर को रोक सकता है क्योंकि बढ़ती मुद्रास्फीति और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट बढ़ते जोखिम पैदा कर रहे हैं। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, केंद्रीय बैंक को आगामी नीति बैठक में अधिक सतर्क रुख अपनाना चाहिए। पिछले फरवरी से RBI ने रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। यह कदम मुद्रास्फीति में कमी आने के बाद आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया था। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों में स्थिति बदल गई है। मुद्रास्फीति के संदर्भ में, कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में वृद्धि देखी जा रही है, जो पश्चिम एशिया के राजनीतिक तनाव का परिणाम है। यह कारक मूल्य स्तर पर दबाव डाल सकता है और RBI की महंगाई नियंत्रण में मदद कर सकता है। ऐसी परिस्थितियों में, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक दर में कोई बदलाव नहीं करना बेहतर होगा। विभिन्न आर्थिक संस्थानों के विशेषज्ञों का कहना है कि RBI को वर्तमान बाजार स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए। खाद्य कीमतों, विनिमय दर और वैश्विक व्यापार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए दर निर्धारण का निर्णय लेना चाहिए। अर्थशास्त्री प्रमोद सक्सेना के अनुसार, ‘अभी के लिए RBI को धैर्य बरतना चाहिए। अगले कुछ सप्ताहों में वैश्विक स्थिति कैसे विकसित होती है, इसे देखना महत्वपूर्ण है।’ उन्होंने कहा कि अगले त्रैमासिक में यदि मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहे, तो RBI आगे की कटौती पर विचार कर सकता है। बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का अनुमान है कि अप्रैल बैठक में दरें रोकने का निर्णय लिया जाएगा। यह RBI के ‘प्रतीक्षा देखें’ (wait and watch) दृष्टिकोण को दर्शाएगा। इस नीति के तहत, केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में किसी भी संकेत मिलने तक अपनी रुख को बरकरार रखेगा। दूसरी ओर, वृद्धि के दृष्टिकोण से, आर्थिक विकास में कुछ धीमापन देखा जा रहा है। प्रारंभिक सूचकांकों से संकेत मिलता है कि Q3 FY25 में GDP की वृद्धि दर में कमी आ सकती है। ऐसी परिस्थितियों में, वर्तमान दर को बरकरार रखना आर्थिक गतिविधियों को स्थिर रखने में मदद करेगा। विश्लेषकों का कहना है कि RBI की अगली नीति बैठक कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें शामिल हैं – बढ़ती मुद्रास्फीति, वैश्विक कीमतें, राजनीतिक स्थिति और देश की आंतरिक आर्थिक स्थिति। अप्रैल में RBI का निर्णय आने वाले महीनों के आर्थिक रुझान को तय करेगा। यह माना जा रहा है कि RBI अगले छह महीनों में 50 से 75 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, यदि मुद्रास्फीति पूर्वानुमान के अनुरूप रहे। हालांकि, यह सब वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। Post navigation Celina Jaitley ने तलाक के दर्द पर खोला दिल