लोकसभा की सीटें बढ़ाने की योजना ‘भ्रम का हथियार’: कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ाने की योजना को ‘जनसंहार का हथियार’ (Weapon of Mass Distraction) बताया है। पार्टी के नेताओं ने यह तर्क दिया है कि यह प्रस्ताव वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए एक रणनीति है।

कांग्रेस का मानना है कि सरकार की यह योजना देश की आर्थिक समस्याओं, बेरोजगारी और महंगाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा है कि यह प्रस्ताव संविधान के मूल्यों को कमजोर करता है।

सीटों की संख्या बढ़ाने से जनसंख्या अधिक वाले राज्यों को अन्यायपूर्ण लाभ मिलेगा, जबकि छोटे राज्यों की प्रतिनिधित्व क्षमता कम हो जाएगी। कांग्रेस का कहना है कि इससे संघीय ढांचे को नुकसान होगा और राज्यों के बीच असंतुलन बढ़ेगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कहा है कि यह सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ऐसे प्रस्ताव ला रही है।

कांग्रेस का तर्क है कि वर्तमान समय में जब देश को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता है, तब सरकार सीटों की संख्या बढ़ाने में व्यस्त है। पार्टी के अनुसार, यह प्रस्ताव जनता के हितों के खिलाफ है और संसद को अव्यावहारिक रूप से बड़ा बनाएगा।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकताएं गलत हैं। वे मानते हैं कि सांसदों की गुणवत्ता में सुधार करना और कानून निर्माण में प्रभावशीलता बढ़ाना ज्यादा महत्वपूर्ण है, न कि केवल संख्या बढ़ाना। कांग्रेस का यह भी कहना है कि यह प्रस्ताव विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ परामर्श के बिना लाया जा रहा है।

पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 का संदर्भ देते हुए कहा है कि लोकसभा की सीटों की कुल संख्या 552 तक सीमित की जानी चाहिए। कांग्रेस का मानना है कि इस सीमा को बढ़ाना देश के लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध है।

कांग्रेस ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विधायकों से भी अपील की है कि वे इस प्रस्ताव का विरोध करें। पार्टी का कहना है कि यदि सीटें बढ़ाई गई तो छोटे राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा और संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद में एक प्रमुख विषय बन सकता है। विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच इस प्रस्ताव को लेकर तीव्र बहस होने की संभावना है। कांग्रेस का यह आरोप कि यह ‘भ्रम का हथियार’ है, केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लगाता है।