बिहार के राज्यसभा चुनावों में करारी हार के बाद विपक्षी महागठबंधन में दरार पड़ गई है। इस चुनाव में सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सभी पांच सीटों पर विजय प्राप्त की है। महागठबंधन की यह शर्मनाक हार राजनीतिक गलियारों में बड़ा सवाल खड़ा कर गई है।
मतदान के समय महागठबंधन के चार विधायकों की अचानक गैरहाजिरी से पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया। इसी कारण NDA को सभी पांच सीटों पर जीत का मौका मिल गया। इस घटनाक्रम से महागठबंधन के घटक दलों के बीच आपसी विश्वास में भारी कमी आई है।
इस हार के लिए राजद ने सीधे तौर पर कांग्रेस पर उंगली उठाई है। राजद के नेताओं ने कांग्रेस पार्टी को महागठबंधन के हित के प्रति लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि अगर कांग्रेस ने अपने कर्तव्यों का पालन किया होता, तो यह स्थिति नहीं आती।
राजद के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, महागठबंधन के विधायकों को मतदान के समय उपस्थित रहने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई थी। यह एक संगठनात्मक विफलता थी जिसके लिए कांग्रेस की केंद्रीय नेतृत्व जिम्मेदार है। राजद का मानना है कि अगर सभी घटक दल एकजुट होते, तो यह हार नहीं होती।
बिहार की राजनीति में यह घटना एक बड़ा संकेत है कि महागठबंधन की एकता में दरार आने लगी है। इससे पहले भी विभिन्न अवसरों पर महागठबंधन के दलों के बीच मतभेद देखे गए हैं, लेकिन इस बार की हार ने सभी को हिला दिया है।
चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना महागठबंधन के लिए एक चेतावनी है। यदि इन दलों ने अपने आंतरिक मतभेदों को न सुलझाया, तो आने वाले विधानसभा चुनावों में उन्हें और भी बड़ी हार का सामना करना पड़ सकता है। बिहार की जनता में भी महागठबंधन के प्रति नकारात्मक संदेश जा रहा है।
इस बीच कांग्रेस पार्टी ने राजद के आरोपों का खंडन किया है। कांग्रेस ने कहा है कि उसने अपनी ओर से सभी संभव प्रयास किए थे। गैरहाजिरी की समस्या सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है, न कि किसी एक दल की।
वर्तमान परिस्थितियों में महागठबंधन के नेताओं को अपने आंतरिक विवादों को सुलझाने की जरूरत है। बिहार की राजनीति में महागठबंधन की महत्ता को देखते हुए, इन दलों को एक-दूसरे के साथ सहयोग की भावना रखनी चाहिए। यही समय है जब ये दल अपनी कमजोरियों को पहचानें और उन्हें दूर करने के लिए कदम उठाएं।