मेघालय में एक संगठन ने राज्य का नाम बदलने की मांग की है। All A’chik Youth Federation (AAYF) ने मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा को 2 अप्रैल को एक पत्र सौंपा है। इस पत्र में संगठन ने मेघालय का नाम बदलकर ‘खासी-जयंतिया-गारो लैंड’ रखने की अपील की है। AAYF के उपाध्यक्ष रिक्कम पी. ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से सीधी बातचीत की है। संगठन का मानना है कि राज्य का नया नाम राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बेहतर ढंग से दर्शाएगा। वर्तमान नाम ‘मेघालय’ का अर्थ ‘बादलों का घर’ है, लेकिन AAYF का कहना है कि नया नाम तीनों प्रमुख जातीय समुदायों – खासी, जयंतिया और गारो को समान महत्व देगा। मेघालय की आबादी मुख्यतः इन्हीं तीन जातीय समुदायों से बनी है। खासी समुदाय पश्चिमी मेघालय में अधिक संख्या में रहता है, जयंतिया समुदाय दक्षिणी इलाकों में केंद्रित है, और गारो समुदाय पश्चिमी भाग में विस्तृत है। AAYF का तर्क है कि ‘खासी-जयंतिया-गारो लैंड’ नाम सभी समुदायों की समान भागीदारी को स्वीकार करता है। राज्य का वर्तमान नाम 1972 में इसे संघीय क्षेत्र से पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के समय रखा गया था। तब से लेकर अब तक, यह नाम राज्य की पहचान बना हुआ है। हालांकि, स्थानीय समुदायों के बीच नाम परिवर्तन को लेकर मतभेद भी हो सकते हैं। AAYF का यह प्रतिनिधित्व सांस्कृतिक पहचान और समावेशन के मुद्दे को लेकर आया है। संगठन का विचार है कि राज्य के नाम में तीनों प्रमुख समुदायों को शामिल करने से राजनीतिक और सामाजिक समरसता बढ़ेगी। यह कदम राज्य की विविधता को भी बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करेगा। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के कार्यालय ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, नाम परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण निर्णय के लिए व्यापक सार्वजनिक परामर्श और संसद की अनुमति आवश्यक होती है। भारत में किसी राज्य का नाम बदलना एक जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए संसद में विशेष कानून पारित करना पड़ता है। अतीत में, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के नाम बदले गए हैं। मेघालय में यदि ऐसा कदम उठाया जाता है, तो इसे विभिन्न हितधारकों और जातीय समुदायों की सहमति लेनी होगी। आने वाले दिनों में देखना होगा कि मेघालय सरकार इस प्रस्ताव पर कितनी गंभीरता से विचार करती है। राज्य के सभी समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए किसी भी निर्णय लिए जाने की संभावना है। Post navigation ईरान युद्ध: वियतनाम जैसी विफलता का खतरा क्रिस्पिन चेत्री महिला फुटबॉल टीम के कोच के रूप में लौटेंगे